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Navratri Do's and don't for Better Result

Navratri means 9 days,
celebration, empowerment and preparation
of
Mind, Body and Soul
for
next season

Navratri Festival
·         Boosting immunity.         
·         Cleaning and Keep ready the our Body for next season.
·         Improving concentration.
·         Purification of mind and body.  
·         Empowering the Soul.

 
PRAY More! MEDIATE More!!

II नवरात्री लघु अनुष्ठान II
·         गायत्री  महामंत्र जप संख्या 24000
नित्य जप 27 माला अर्थात 2700 मंत्र
यथा संभव प्रातःकाल में जप पूरा कर ले
एक माला = 108 मंत्रो का जप 
(समय 8-10 मिनट नए साधकों के लियें )
अथवा 
240 गायत्री चालीसा पाठ
नित्य 27   गायत्री चालीसा पाठ
      ·         ब्रम्हचर्य का पालन, भूमि शयन / तखत पर शयन
·         अधिकाधिक मौन और सतत मानसिक जप
·         घर पर बना सात्विक आहार
·         शरीर में जल की कमी न होने दे
शरीर की शुद्धि के लिए भी आवश्यक है
·         जप के दसवे हिस्से की यज्ञ में आहुति
·         दान करें - अच्छी पुस्तकें बालकों एवं युवाओं में वितरित करें
·         नित्य स्वाध्याय –
 पूज्यवर की अमृतवाणी (भाग─1) [Vol.68] (वांग्मय - आध्यात्मिक विश्वकोश)
 गायत्री महाविज्ञान
·         बिना स्वाध्याय के प्रगति मुश्किल है  
  

नवरात्री गायत्री अनुष्ठान के  बारे में विस्तृत जानकारी हेतु :
पूज्य गुरुदेव की
गायत्री महाशक्ति की उपासना,
उससे जुडी रिसर्च एवं अध्ययन एवं अनुभव पर
पुस्तक  "गायत्री महाविज्ञान" पुस्तक का अध्ययन करें

आपके घर परिवार में स्वास्थ्य, प्रसन्नता और समृद्धि की मंगल कामनाएं

||  NAVRATRI LAGHU ANUSTHAN   || 
  • Gayatri Mantra JAP 
  • 27 Mala Gayatri Mantra JAP for Navratri Anusthan
  • 3 Mala Gayatri Mantra JAP for daily Upasana

Wish you and your family Happy and Healthy Navratri


Do's and don't for
Better Result in this navratri 

  
DRINK more...
 
·         Drink plenty of water sip by sip.
·         Drink Warm water in morning and evening.

"उपवास प्रारम्भ होने पर
नित्य के नियमानुसार
भोजन से शरीर को शक्ति प्राप्त नहीं होती,
अतएव इसके लिये
अन्य उपाय कामें लाने चाहिए, 

यथा-शुद्ध वायु और शुद्ध जल का उपयोग।
शुद्ध वायु में
गहरी सांस लेने से प्राणवायु के स्पर्श से
रक्त में पहले से उपस्थित
विषेले तत्व दूर होते हैं।

उपवास काल में
कोई अप्राकृतिक खाद्य शरीर में नही जाता,
अतएव विजातीय द्रव्य रक्त में नहीं मिलते
तथा उसकी शुद्धि होती है।"


लम्बे उपवास तोड़ने में
काफी सावधानी बरतनी चाहिए।
नींबू के पानी या सन्तरे-मौसमी आदि
के रस से तोड़ना चाहिए।
फिर एक दिन तक मौसम के फल लेने चाहिए।
जितने दिन तक उपवास किया गया हो,
उसके चौथाई समय तक फल लेने चाहिए,
 तदुपरान्त अन्न खाना चाहिए।
पर यह ध्यान रखना चाहिए कि
उपवास के बाद पुन: गलत भोजन न ले।
ऐसा करने पर उपवास का लाभ भी जाता रहेगा
तथा शरीर शुद्ध हो जाने पर
यदि विजातीय द्रव्य शरीर में जाएगा
तो पूरी मात्रा में वह शरीर के लिए हानिकारक होगा। 

पुस्तक  : स्वास्थ्य रक्षा प्रकृति के अनुसरण से ही सम्भव, पृष्ठ-47- 48.
पं. श्रीराम शर्मा आचार्य , संस्थापक एवं सरंक्षक गायत्री परिवार  





Drink Lemon + Honey Water

Drink Coconut Water and other Juice

Drink Milk and Butter Milk (chaash)
  
Choose any one
Eating Option for 9 days,
as per your body permit and working life


Option #1
Fruits/ Salad/ Boiled Vegetables/ Sprouts/ Milk only

Option #2
Single Meal in a day.

Option #3
Single Meal in a day and Fruits/ Salad/ Boiled Vegetables/ Milk. 

Points to keep in mind
·         Choose wisely food for Senior citizen and Patients
·         Try to AVOID Fasting during pregnancy, but PRAY and READ more !!!
·         Add Dalia, Salad  and Sprouts in your Meal
·         Eat more vegetables than Wheat, Rice etc.
·         Drink more water, Lemon water and Juice.

READ More...
·         The Gita, The Ramayana
·          Inspiring Books like “Rishi Chintan”
·         Any other holy books.
 
Avoid !!!
·         Cold Drinks, Alcohol
·         Smoking
·         Outside Food
·         Fried Food
·         Fried Potato (It leads to fast aging also.), you may take BOILED potato.
·         Heavy Diet
·         Spicy Food

19 Questions for stay HEALTHY





अपने आप से 19 प्रश्न पूछिये

अपने हाथों में स्वास्थ्य:

1.) क्या हम तीव्र भूख लगने पर ही खाते हैं ?
2.) पहला भोजन पचने की प्रतीक्षा किये बिना, क्या बीच-बीच में कुछ वस्तुयें स्वाद के लिए तो नहीं खाते रहते हैं ?

3.) कहीं आधे पेट से आधिक भोजन तो नहीं कर लेते ?
4.) कहीं पतली चीजों के साथ भोजन जल्दी तो नहीं निगल लेते ?
5.) क्या भोजन में अन्न आधे से कम रहता है ?

6.) हंसने और मुस्कुराने कि आदत तो नहीं छोड़ दी है ?
7.) क्या इतना श्रम करते हैं की थककर रात को सो जाएँ ?

8.) क्या दिनचर्या में व्यायाम, मालिस, आसन, टहलना शामिल हैं ?
9.) क्या हम उपवास करते हैं ?
10.) क्या जल्दी सोते, जल्दी उठते है ?
11.) क्या हम ब्रह्मचर्य कि मर्यादा का पालन करते हैं ?

12.) शारीरिक, मानसिक श्रम की मात्र शक्ति से बाहर तो नहीं हैं ?
13.) क्या हम चिन्ता, शोक, क्रोध, आवेश, इर्ष्या, द्वेष, उत्तेजना, भय, आशंका, निराशा से ग्रसित तो नहीं हैं ?
14.) क्या हमने उपासना के लिए दैनिक कार्यक्रम में कोई समय नियत रखा हैं ?

15.) बात बात में दवा की भरमार तो नहीं करते हैं ?
16.) चाय, तम्बाकू, पान की भरमार से पेट ख़राब तो नहीं हो रहा है ?
17.) कहीं हमारा भोजन मांस, मछली, पकवान, मिठाई, चटनी, आचार, मिर्च मसले जैसे हानिकारक पदार्थों से नहीं भरा रहता है ?
18.) क्या हमको गंदगी से घृणा है ?

19.) क्या हमारी रोटी बेईमानी से तो कमाई हुई नहीं होती ?


Acharya Shriram Sharma
Author of 3200 Books
Gayatri Pariwar Books